The golden age of the contribution of some great men in lighting the flame of sacred knowledge

What does it mean to be spiritual

पवित्र ज्ञान की ज्योति जलाने में कुछ महापुरुषों के योगदान का स्वर्णिम काल

(1)- श्री तोतापुरी जी – 1780 – 1866
(2)- श्री आनंदपुरी जी – 1782-1872
(3)- श्री अद्वैतानंद जी – 1840 -1919
(4)- श्री स्वरूपानंद जी – 1884- 1936
(5)- श्री हंस जी – 1900- 1966
(6)- श्री प्रेम रावत जी – 1957- से अब-तक के सबसे प्रसिद्ध महापुरुष।



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